|| दश धर्म स्कंद ||

संसार के समस्त प्राणियों में मानव श्रेष्ष्ठ है। मनुष्य ज्ञान के साथ आचार का पालन कर सकता है। आचार से सभी सद्गुणों की प्राप्ति होती है। कीर्ति की अभिवृद्धि के साथ विद्या की भी उपलब्धि आचार से ही होती है। आचार को ही शास्त्रों में चारित्र शब्द से वर्णित किया है - ’’चारितं खलु धम्मो’’ अर्थात् चारित्र ही वास्तविक धर्म है। धर्म की महिमा अपार है क्योंकि धर्म ही एक मात्र दुखों से छुडाकर सुख में पहुंचाता है जैसा कि कहा है -

संसारसागरनिमग्नशरीरिवृन्दमुद्धत्य यो धरित मोक्षनिकेतनात्नः।
सज्ज्ञानभनुविदिताखिलवस्सतुतत्वैः प्रोक्तो जिनैरखिलसौख्यकरः स धर्मः।।

अर्थात- जो संसार सागर में डूबे हुए जीवों को उससे निकालकर मुक्ति निकेतन में पहुंचता है। सम्यग्ज्ञानरूपी सूर्य के द्वारा सम्पूर्ण तत्वों को जानने वाले वीतरागी सर्वज्ञदेव ने उसी को सर्वसुखकारी धर्म कहा है।Read More...